अगले महीने आ सकता है 100 का नया नोट, देवास में छपाई शुरू, बैंगनी रंग का होगा नया नोट

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इंदौर: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने साफ़ किया है कि जल्द ही 100 के नए नोट जारी किये जायेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 100 का यह नया नोट बैंगनी रंग का होगा। इस नोट पर वैश्विक धरोहर में शामिल गुजरात की रानी की बावड़ी बनी होगी। अगर 100 के नए नोट के आकार की बात करें तो यह पुराने 100 के नोट से थोड़ा छोटा और 10 के नए नोट से थोड़ा बड़ा होगा। 100 के नए नोट शुरू होने के बाद भी 100 के पुराने नोट चलन में रहेंगे।

सूत्रों से पता चला है कि 100 के नए नोट की छपाई देवास प्रेस में शुरू हो चुकी है। जानकारी के अनुसार 100 के नए नोट को मैसूर के उसी प्रेस में डिजाईन किया गया है, जहाँ 2000 के नोट छपे जाते हैं। आरबीआई के अनुसार नोट छापने में सबसे बड़ा बदलाव इस बार ये किया गया है कि नोट छापने का कागज और स्याही भारत के ही होंगे। मैसूर में जो नमूने के लिए नोट छापे गए थे, उसमें विदेशी स्याही का इस्तेमाल किया गया था।

किया गया है नए नोट की साइज़ में बदलाव:

देवास में स्वदेशी स्याही के इस्तेमाल की वजह से नमूने अलग थे, लेकिन उनके रंगों का मिलान कर लिया गया है। नया नोट आकार और वजन में भी कम होगा। पहले 100 के नोट की एक गड्डी का वजन 108 ग्राम था, लेकिन 100 के नए नोट की एक गड्डी का वजन केवल 80 ग्राम ही होगा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की मुहर लगने के बाद 100 के नए नोट का प्रोडक्शन भी देवास में शुरू हो चुका है। जानकारी मिली है कि आरबीआई अगस्त या सितम्बर माह में 100 के नए नोट जारी कर देगा। इस बार फिर नोट के साइज़ में बदलाव किया गया है, इस वजह से एटीएम को एक बार फिर नोट के केस में बदलाव करना होगा।

सुरक्षा फीचर को देखा जा सकेगा अल्ट्रावायलेट किरणों की मदद से:

2014 में सत्ता में आई मोदी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार होगा जब बैंक एटीएम में बदलाव करना होगा। इससे पहले एटीएम में 2000, 500 और 200 के नए नोट के लिए करने पड़े थे। जानकारी मिली है कि नए नोट में कई नए सुरक्षा फीचर इस्तेमाल किये गए हैं। हलांकि इन्हें नंगी आँखों से आसानी से नहीं देखा जा सकता है। इन्हें केवल अल्ट्रा वायलेट किरणों की मदद से देखा जा सकेगा। 2000, 500 के नए नोट आने के बाद से लोग 100 के नए नोट का बेशब्री से इंतज़ार कर रहे थे। अब लोगों का यह इंतज़ार जल्दी ख़त्म होने वाला है।

100 के नए नोट पर जिस गुजरात की रानी की बावड़ी को शामिल किया गया है, उसे यूनेस्को ने 2014 में विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया था। इस बावड़ी को 1063 में गुजरात के शासक भीमदेव सोलंकी प्रथम की याद में उनकी रानी उदयमति ने बनवाया था। लगभग 700 साल तक यह बावड़ी सरस्वती नदी की गाद में दबी हुई थी, लेकिन पिछली शताब्दी में पुरातत्व विभाग ने इसे खोज निकाला। यूनेस्को ने इसे भारत में स्थित सभी बावड़ियों में रानी का ख़िताब भी दिया है।

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